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जिनका मन काला होता है उनका दिल भी काला होता है

  जिनका मन काला होता है उनका दिल भी काला होता है ऐसा मनोरोगों के माहिर सभी मनोविद (साइक्याट्रिस्ट )और मनो -रोगों के सलाहकार क्लिनिकल साइक्लोजिस्ट कहते हैं। 

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कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

Karpur Gauram Mantra: भगवान शिव की आरती के बाद जरूर पढ़ते हैं यह मंत्र हिंदू सनातन धर्म में पूजा के समय मंत्र उच्चारण का बहुत महत्व माना जाता है। शास्त्रो में भी सभी देवी-देवताओं की पूजा में अलग-अलग मंत्रों के उच्चारण का विशेष महत्व बताया गया है। मंत्र जाप करने या उच्चारण करने का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी माना जाता है। मंत्र जाप करने से शरीर में एक प्रकार का कंपन उत्पन्न होता है, जिससे हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है। हिंदू धर्म में हर मांगलिक अनुष्ठान मंत्रोच्चारण के साथ ही संपन्न किया जाता है। मंदिरों में दैनिक पूजा में आरती के पश्चात कुछ मंत्रो का उच्चारण विशेष रुप से किया जाता है। एक मंत्र ऐसा भी है जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इस मंत्र का उच्चारण अवश्य किया जाता है। https://www.amarujala.com/spirituality/religion/know-the-karpur-gauram-karunavtaram-mantra-meaning-and-significance-in-hindi भगवान शिव की आराधना का पवित्र माह सावन आज से शुरू हो गया है। आज से 30 दिनों तक भगवान शिव और माता पार्वती के साथ उनके परिवार की भी पूजा होगी। समस्त मंगलकामन...

They Love Their Water Bodies (US and India III installments ,HIndi ):प्रेम करो जल से थल से नभ से तभी खुद को प्रेम कर पाओगे। हमारा पर्यावरण पारिस्थितिकी ही तो हम हैं

 शिकागो में शिकागो नदी के अलावा एक झील भी है एक पूरा हिमनद (ग्लेशियर )इसका नियमित जलश्रोत है। संध्या को शिकागो स्काई लाइन देखते वक्त मैंने देखा झील के निर्मल पारदर्शी पानी में तलहटी में पड़ा एक पैन्स भी गोचर होगा मुखरित होगा किसी सुमुखि के चेहरे सा। नियाग्रा फाल्स को नियाग्रा शहर (कनाडा )और बुफैलो (न्यूयॉर्क ,अमरीका )की तरफ से भी देखा बुफालो साइड से फाल के नज़दीक पहुँच कर देखा सिक्के पड़े हैं स्वच्छ जल में अपनी अलग पहचान और अस्तित्व के साथ।  यहां अपने प्रांगण में गंगा एवं इतर नदियाँ   गीत संगीत में हमारे  गानों में हमारी माँ हैं  व्यवहार में रखेल सा बर्ताव क्या हम उनके साथ नहीं करते शव से लेकर कुछ भी उनमें विसर्जित कर देते हैं शहरी अपशिष्ट मलमूत्र से लेकर कुछ भी कभी  छट पूजा तो कभी गणेशचतुर्थी कभी दुर्गा पूजा के नाम पर।  अमरीकी और योरोप वासी अपने परिवेश को, निकटतर  एम्बिएंस को साफ़ सुथरा रखते हैं जी जान से। हमारी मिट्टी ,हवा और पानी ही तो हम हैं। एक दिन हमें भी सुपुर्दे ख़ाक होना है उस साइल को तो न गंधायें ,हवा पानी मिट्टी यहां सबकुछ गंधाने लगा है...

ज़ुबाँ संभाल के

ज़ुबाँ संभाल के  हर्ष का विषय है अरविन्द केजरीवाल साहब अब नारायण सामी (वर्तमान मुख्यमंत्री ,पुडुचेरी )की ज़ुबान नहीं बोल रहे हैं। महिलाओं के लिए मुफ्त सवारी डीटीसी और क्लस्टर बसों में कामगार वर्ग के लिए एक अच्छा तोहफा ज़रूर है। उन्हें चंद वोट इस एवज़ फ़ालतू भी मिल सकते हैं। मगर उनकी उस जुबां का क्या हुआ जो पहले (चुनाव पूर्व संकल्प में ५,००० अतरिक्त बसों की )और बाद में १०,००० अतिरिक्त बसें डीटीसी के पाले में लाने की बात कह रही थी।  आप को एक और बात के लिए भी बधाई अब आप पढ़े लिखों जैसी जुबां इस्तेमाल कर रहें हैं। लेकिन प्रदूषण के मामले में आप की बात में ज़रा भी वजन इसलिए नहीं है क्योंकि आप हैप्पी -सीडिंग की बात न करके धान की फसल के बचे खुचे अंश पराली के सर पर सारा वजन लाद रहें हैं।  हमारा मानना है हमारी होनहार छात्रा (किशोरी अमनदीप )से जो किसानी को पर्यावरण के अनुरूप ले जाने वाली परम्परा की अग्रदूत बन गई है आप सीख लेते हुए कुछ हैप्पी सीडिंग सुविधाएं किसानों को मुहैया करवाने की बात कहते।  इससे एक तरफ  मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती दूसरी तरफ ६०- ७० फीसद तक रासायनिक ...